गया में पिंडदान से सात पीढ़ियों को मिलता है मोक्ष

गया में पिंडदान से सात पीढ़ियों को मिलता है मोक्ष
August 29, 2019 No Comments Gayaji Dham admin

pay someone to do my assignment phd thesis supervisor resume writing service edmonton leadership term papers गया। पितरों के लिए खास आश्विन माह के कृष्ण पक्ष या पितृपक्ष में मोक्षधाम गयाजी आकर पिंडदान एवं तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और माता-पिता समेत सात पीढ़ियों का उद्धार होता है।
पवित्र फल्गु नदी के तट पर बसे प्राचीन गया शहर की देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पितृपक्ष और पिंडदान को लेकर अलग पहचान है।

Clicking Here online safe at our cheap college paper service. BuyEssaySafe.com provides professional academic writing help. Place an order and get your essay! पितृपक्ष के साथ-साथ तकरीबन पूरे वर्ष लोग अपने पूर्वजों के लिए मोक्ष की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं और फल्गु नदी के तट पर पिंडदान और तर्पण आदि करते हैं।

see - Why be concerned about the assignment? apply for the needed help on the website Learn everything you need to know about custom गया शहर के पूर्वी छोर पर पवित्र फल्गु नदी बहती है। माता सीता के श्राप के कारण यह नदी अन्य नदियों के तरह नहीं बह कर भूमि के अंदर बहती है इसलिए इसे ‘अंत सलीला’ भी कहते हैं।

Dissertation service. dissertations & assignments Get best essay importance of research papers help writing service UK If youre feeling stressed. Master thesis गयावाल पंडा समाज के शिव कुमार पांडे बताते हैं कि वायुपुराण में फल्गु नदी की महत्ता का वर्णन करते हुए ‘फल्गु तीरथ’ कहा गया है तथा गंगा नदी से भी ज्यादा पवित्र माना गया है।

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http://www.cgmediagroup.com/writing-essay-helpful-phrases/, buy pgce essays, essay writing service cheapest | Complete set of services for students of all levels including academic फल्गु नदी के जल का महत्व इतना ज्यादा है कि ऐसी मान्यता है कि नदी में पांव पड़ने से उड़ने वाले पानी की छिंटे मात्र से भी पूर्वजों की आत्मा की मुक्ति हो जाती है। पैर के स्पर्श से उड़ने वाली पानी की छिंटे को भी पवित्र मानकर पूर्वजों की आत्मा इस छिंटे को भी ग्रहण कर लेती है।

Get best phd research proposal in service marketings in U.S. at MyAssignmenthelp.com. Top paper editing services in U.S. at low price available. Avail when you need paper editors राजस्थान से अपने पूर्वजों का पिंडदान करने आए संजय सेठ का मानना है कि यदि पितरों की आत्मा को मोक्ष नहीं मिला है तो उनकी आत्मा भटकती रहती है। इससे उनकी संतानों के जीवन में भी कई बाधाएं आती है। इसलिए गयाजी आकर पितरों का पिंडदान अवश्य करना चाहिए।

वहीं विष्णुपद मुहल्ले में रहने वाले पंडा महेश लाल गुप्त बताते हैं कि सर्वप्रथम आदिकाल में जन्मदाता ब्रह्मा और भगवान श्रीराम ने फल्गु नदी में पिंडदान किया था। महाभारत के वन पर्व में भीष्म पितामह और पांडवों द्वारा भी पिंडदान किए जाने का उल्लेख है।

गयापाल पंडों के पास उपलब्ध साक्ष्यों से मौर्य और गुप्त राजाओं से लेकर आध्यात्म युग के रामकृष्ण परमहंस तथा चैतन्य महाप्रभु जैसे महापुरुषों ने भी फल्गु नदी में श्राद्धकर्म और तर्पण किया था।

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