‘मोक्ष की धरती’

‘मोक्ष की धरती’
August 29, 2019 No Comments Gayaji Dham admin

पितृपक्ष यानी महालया में कर्मकांड की विधियां और विधान अलग-अलग हैं. श्रद्घालु एक दिन, तीन दिन, सात दिन, 15 दिन और 17 दिन का कर्मकांड करते हैं. इस दौरान पूर्वजों की मृत्युतिथि पर श्राद्ध किया जाता है

हिंदू धर्म में पितरों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए गया में पिंडदान को एक अहम कर्मकांड माना जाता है. बिहार का गया इसके लिए सवरेतम स्थान माना गया है. इस साल छह से 20 सितंबर के बीच बिहार के गया में पितृपक्ष मेला लगने जा रहा है.

इस मेले में आने वाले देश और विदेश के श्रद्घालुओं के लिए बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम ने टूर पैकेज की ऑनलाइन बुकिंग शुरू की है. भाद्रपद महीने के कृष्णपक्ष के 15 दिन को ‘पितृपक्ष’ कहा जाता है.

इस पखवारे में लोग अपने पूर्वजों के मृतात्माओं की मुक्ति के लिए यहां आकर पिंडदान करते हैं, यही कारण है कि गया को ‘मोक्ष की भूमि’ भी कहा जाता है. 

गया की धरती मोक्ष भूमि कहलाती है। इस पितृ तीर्थ पर एक ऐसा स्थान है जो हिंदुओं के लिए स्वर्ग और मोक्ष के समान महत्व रखता है। धार्मिक दृष्टि से गया न सिर्फ हिंदुओं के लिए बल्कि बौद्ध धर्म मानने वालों के लिए भी गहरी आस्था का केंद्र है।

हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पूर्वजों को याद करने के साथ उन्हें श्रद्धा के साथ पिंडदान करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। यही कार्न है कि श्राद्ध के समय में इस स्थान पर हर कोई अपने पितरों के लिए पिंडदान करता है।

कहते हैं कि इस पवित्र तीर्थ स्थल पर पितृ के निमित्त किया गया श्राद्ध पितरों को मोक्ष दिलाता है। परंतु क्या आप जानते हैं कि यह तीर्थ स्थान क्यों इतना खास है? साथ ही किस वजह से यह धरती मोक्ष की भूमि कहलाती है?

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